राष्ट्र-निर्माण में गाँव की भूमिका : गांधी और नेहरू की दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन
प्रस्तुत शोध आलेख “राष्ट्र-निर्माण में गाँव की भूमिका: गांधी और नेहरू की दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन” भारतीय राष्ट्रवाद की अवधारणा को ग्राम-केंद्रित परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करता है। इसमें यह प्रतिपादित किया गया है कि राष्ट्र केवल राजनीतिक सत्ता-संरचना नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और नैतिक प्रक्रियाओं का समेकित परिणाम है, जिसकी जड़ें भारतीय ग्राम-व्यवस्था में निहित रही हैं। यह शोध आलेख राष्ट्र की आधुनिक अवधारणा को साझा चेतना और सामूहिक अनुभव से निर्मित मानते हुए ग्राम को सामाजिक संगठन की मूल इकाई के रूप में रेखांकित करता है । अध्ययन का मुख्य फोकस गांधी और नेहरू की ग्राम-दृष्टियों का तुलनात्मक विश्लेषण है। गांधी ने ‘ग्राम स्वराज’ को नैतिक आत्मशुद्धि, विकेंद्रीकरण, कुटीर उद्योग और आत्मनिर्भरता पर आधारित आदर्श लोकतांत्रिक संरचना के रूप में देखा। उनके लिए स्वराज व्यक्तिगत नैतिकता से प्रारंभ होकर सामुदायिक स्वशासन में परिणत होता है। दूसरी ओर, नेहरू ने ग्रामीण भारत को आधुनिक वैज्ञानिक, औद्योगिक और योजनाबद्ध विकास की आधारभूमि माना। उन्होंने सामुदायिक विकास कार्यक्रम, पंचायती राज और कृषि-आधारित नीतियों के माध्यम से ग्राम-उत्थान को राष्ट्रीय प्रगति से जोड़ा ।
कुमारी, . (2026). राष्ट्र-निर्माण में गाँव की भूमिका : गांधी और नेहरू की दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन. International Journal of Science, Strategic Management and Technology, 02(03). https://doi.org/10.55041/ijsmt.v2i3.054
कुमारी, अलका. "राष्ट्र-निर्माण में गाँव की भूमिका : गांधी और नेहरू की दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन." International Journal of Science, Strategic Management and Technology, vol. 02, no. 03, 2026, pp. . doi:https://doi.org/10.55041/ijsmt.v2i3.054.
कुमारी, अलका. "राष्ट्र-निर्माण में गाँव की भूमिका : गांधी और नेहरू की दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन." International Journal of Science, Strategic Management and Technology 02, no. 03 (2026). https://doi.org/https://doi.org/10.55041/ijsmt.v2i3.054.
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